कविता तुम्हारी मुस्कुराहट – Danish Raza

तुम मुस्कुराती हो ऐसे कड़ी धूप में छांव हो जैसे बसंत की हवा हो जैसे तुम मुस्कुराती हो ऐसे तबले की ताल हो जैसे वीणा से निकलती तान हो जैसे तुम मुस्कुराती हो ऐसे फूलों पे शबनम हो जैसे खिलता हुआ गुलाब Read More