hindi poetry

फिर अच्छे दिन आएँगे

1
ये रात स्याह कट जायेगी,
फिर से नई सुबह आएगी ।
थोड़ा सा धीरज तू रख ले,
ये स्याह रात लंबी सह ले।
तू श्रद्धा और सबुरी रख,
फिर से अच्छे दिन आएँगे ।
2
ये स्याह रात लंबी माना,
मुश्किल है इनका कट पाना,
तू चिन्ता छोड़ चिन्तन कर ले,
कड़े के निश्चिन्तता की चादर,
तू गहरी निद्रा में सो ले,
जब तेरी निद्रा छूटेगी,
तब फिर से नई सुबह होगी।
तू श्रद्धा और सबुरी रख ।
फिर से अच्छे दिन आएँगे ।।
3
जब तू सुबह को जागूँगा,
रश्मि से धरा का मिलन होगा,
सुनहरी छटा से नाह कर धरा,
जुल्फों को अपनी सँवारेगी,
चिड़ियाँ चहकेंगी आँगन में,
खुशबु से गुलशन महकेगा,
गुलजार होंगे जब सब उपवन,
तितलियाँ रंग- बिरंगी, मडरायेंगी,
भौंरे ,भ्रमरगीत तब गाएंगे,
देखना अच्छे दिन आएँगे,
देखना अच्छे दिन आएँगे ।
4
गोरी के हँसने से,पनघट
,देखना फिर से आबाद होंगे,
पाँवों में पायल छनकेंगे,
हाथों में कंगना खनकेंगे ।
बिन्दियाँ चमकेगी माथे पर,
गगरियों से फिर जल छलकेंगे।
तू श्रद्धा और सबुरी रख,
फिर से अच्छे दिन आएँगे ।।
5
अपनों से मिलने को अपने,
जब अपनों के घर आएँगे,
तब घर-घर खुशहाली होंगी,
महफिल में ठहाके गुजेंगे ।
तू श्रद्धा और सबुरी रख,
फिर से अच्छे दिन आएँगे ।।
6
कुछ अपने,अपनों से बिछड़,
वे अंधेरों में विलीन हुए,
कुछ चेहरों में खामोशी छायी,
और कुछ घर खामोश हुए ।
कुछ अपनें, अपनों की प्रतीक्षा,
करने लगे,बाहर,घर के छज्जे में,
शायद उनके बिछुड़े अपने,
उनसे मिलने को आएँगे ।
ये विश्वास करते हैं वों,
कि फिर से अच्छे दिन आएँगे ।।
7
जब तक उनकों विश्वास रहा,
जीवन जीने का विश्वास रहा,
जैसे ही उनका भ्रम टूट गता,
अब उनको उन पर विश्वास जगा,
हर उन रिश्तों ने छला उन्हें,
जिनपर उनको विश्वास रहा।
अब किंकर्तव्यविमूढ़ थे वो,
कि अब किस पर विश्वास करें,
खोया विश्वास जो रिश्तों पर,
फिर से वापस लौटेंगे,
तू श्रद्धा और सबुरी रख,
फिर से अच्छे दिन आएँगे ।।
8
जो क्षति हुई है अपनों की,
उसकी भरपाई तो ना हो पाएगी,
पर कुछ रिश्ते ऐसे भी होंगे,
जो सच्चे और खरे होंगे,
जो उन रिश्तों से मिलन होगा,
तो बुझे चेहरे खिल जाएँगे,
तू श्रद्धा और सबुरी रख,
फिर से अच्छे दिन आएँगे ।।

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One Thought to “फिर अच्छे दिन आएँगे”

  1. Santosh Pandey

    Superb sir…….

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